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यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप

यूक्लिड का मुख्य उद्देश्य डार्क मैटर (Dark Matter) और डार्क एनर्जी (Dark Energy) के गुणों का अध्ययन करना है..

यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप

Tiwari
February 15, 2025

यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य (main objective) क्या है?🔗

यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency - ESA) का एक मिशन है, जिसे "डार्क यूनिवर्स" (Dark Universe) के रहस्यों को समझने के लिए बनाया गया है। इसे 1 जुलाई, 2023 को लॉन्च (launch) किया गया था।

यूक्लिड का मुख्य उद्देश्य डार्क मैटर (Dark Matter) और डार्क एनर्जी (Dark Energy) के गुणों का अध्ययन करना है। यह ब्रह्मांड (universe) के त्वरित विस्तार (accelerating expansion) को सटीक रूप से मापकर, यह समझने में मदद करेगा कि डार्क एनर्जी इस विस्तार को कैसे प्रभावित करती है।


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यूक्लिड टेलीस्कोप कैसे काम करता है? इसमें कौन-कौन से उपकरण (instruments) लगे हैं?🔗

यूक्लिड टेलीस्कोप में 1.2-मीटर व्यास (diameter) का एक दर्पण (mirror) है जो दूर की आकाशगंगाओं (galaxies) से आने वाले प्रकाश को इकट्ठा करता है। इस प्रकाश को फिर दो मुख्य उपकरणों (instruments) में भेजा जाता है:

  • दृश्यमान प्रकाश कैमरा (Visible Light Camera - VIS): यह कैमरा दृश्यमान प्रकाश (visible light) में उच्च-रिज़ॉल्यूशन (high-resolution) वाली तस्वीरें लेता है। इन तस्वीरों का उपयोग अरबों आकाशगंगाओं के आकार को मापने के लिए किया जाता है। VIS, 550 nm (हरा/green) से 900 nm (near-infrared) तक के प्रकाश के प्रति संवेदनशील है, और इसमें 36 CCDs (Charge Coupled Devices) हैं, कुल मिलाकर लगभग 600 मेगापिक्सेल।

  • नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर और फोटोमीटर (Near-Infrared Spectrometer and Photometer - NISP): यह उपकरण इन्फ्रारेड प्रकाश (infrared light) में आकाशगंगाओं की तस्वीरें लेता है और उनकी दूरी (redshift) को मापता है। NISP, 900-2000 nm के निकट-अवरक्त प्रकाश को मापता है और इसमें 16 डिटेक्टरों का एक ग्रिड है।


यूक्लिड टेलीस्कोप "डार्क एनर्जी" और "डार्क मैटर" का अध्ययन कैसे करेगा?🔗

यूक्लिड दो मुख्य तकनीकों का उपयोग करेगा:

  • दुर्बल गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग (Weak Gravitational Lensing): डार्क मैटर (Dark Matter) अदृश्य होता है, लेकिन यह अपने गुरुत्वाकर्षण (gravity) से प्रकाश को मोड़ता (bend) है। यूक्लिड अरबों आकाशगंगाओं के आकार में होने वाले इस मामूली बदलाव (subtle distortion) को मापेगा, जिससे डार्क मैटर के वितरण (distribution) का पता चलेगा।

  • आकाशगंगा क्लस्टरिंग (Galaxy Clustering): यूक्लिड आकाशगंगाओं के त्रि-आयामी वितरण (3D distribution) को मापेगा। यह वितरण डार्क मैटर (Dark Matter) और डार्क एनर्जी (Dark Energy) दोनों से प्रभावित होता है। आकाशगंगाओं के वितरण में परिवर्तन का अध्ययन करके, वैज्ञानिक डार्क एनर्जी के गुणों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


यूक्लिड मिशन से हमें क्या-क्या नई जानकारी मिलने की उम्मीद है?🔗

यूक्लिड मिशन से ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ में क्रांति लाने की उम्मीद है:

  • डार्क एनर्जी की प्रकृति: यूक्लिड हमें बताएगा कि क्या डार्क एनर्जी एक ब्रह्माण्ड संबंधी स्थिरांक (cosmological constant) है, या कुछ और अधिक गतिशील (dynamic) है।
  • डार्क मैटर का वितरण: यूक्लिड ब्रह्मांड में डार्क मैटर के वितरण का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा बनाएगा।
  • ब्रह्मांड का विस्तार: यूक्लिड ब्रह्मांड के विस्तार के इतिहास को सटीक रूप से मापेगा।
  • गुरुत्वाकर्षण का परीक्षण (Testing Gravity): यूक्लिड आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत (Einstein's theory of general relativity) को ब्रह्माण्ड संबंधी पैमानों (cosmological scales) पर परीक्षण करेगा।

यूक्लिड मिशन की अवधि (duration) कितनी है और यह कहाँ स्थित है?🔗

यूक्लिड मिशन की नाममात्र अवधि (nominal duration) 6 वर्ष है। यूक्लिड सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु 2 (Sun-Earth Lagrange point L2) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा (halo orbit) में स्थित है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है।


आइंस्टीन रिंग क्या है? यह कैसे बनती है?🔗

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आइंस्टीन रिंग एक दुर्लभ खगोलीय घटना (rare astronomical phenomenon) है जो गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग (gravitational lensing) के कारण होती है। जब एक दूर की आकाशगंगा (distant galaxy) से आने वाला प्रकाश, एक विशाल अग्रभूमि आकाशगंगा (massive foreground galaxy) या ब्लैक होल (black hole) के पास से गुजरता है, तो अग्रभूमि वस्तु का गुरुत्वाकर्षण प्रकाश को मोड़ देता है। यदि स्रोत (source), लेंस (lens), और प्रेक्षक (observer) पूरी तरह से एक सीध (perfect alignment) में हों, तो प्रकाश एक वलय (ring) के आकार में दिखाई देता है, जिसे आइंस्टीन रिंग कहते हैं।

आइंस्टीन रिंग निर्माण और सिद्धांत
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आइंस्टीन रिंग के निर्माण की प्रक्रिया (Formation Process):

  1. प्रकाश उत्सर्जन (Light Emission): एक दूर की आकाशगंगा प्रकाश उत्सर्जित करती है।
  2. गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग (Gravitational Lensing): एक विशाल अग्रभूमि आकाशगंगा (जैसे NGC 6505) अपने विशाल गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के कारण प्रकाश को मोड़ती है।
  3. रिंग का गठन (Ring Formation): यदि सब कुछ पूरी तरह से संरेखित (perfectly aligned) है, तो प्रकाश अग्रभूमि आकाशगंगा के चारों ओर घूमता है, जिससे एक चमकदार आइंस्टीन रिंग बनती है।

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आइंस्टीन रिंग का महत्व (importance) क्या है?🔗

आइंस्टीन रिंग खगोल विज्ञान (astronomy) में बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि:

  • डार्क मैटर का अध्ययन (Studying Dark Matter): आइंस्टीन रिंग हमें डार्क मैटर के वितरण (distribution) और मात्रा (amount) का अध्ययन करने में मदद करती हैं, क्योंकि डार्क मैटर भी प्रकाश को मोड़ता है।
  • दूर की आकाशगंगाओं का अध्ययन (Studying Distant Galaxies): गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग (gravitational lensing) एक प्राकृतिक आवर्धक लेंस (natural magnifying glass) के रूप में कार्य करता है, जिससे हम उन दूर की आकाशगंगाओं को देख पाते हैं जो अन्यथा बहुत धुंधली होतीं।
  • ब्रह्मांड के विस्तार का मापन (Measuring the Expansion of the Universe): आइंस्टीन रिंग का उपयोग ब्रह्मांड के विस्तार की दर को मापने के लिए किया जा सकता है।
  • सामान्य सापेक्षता का परीक्षण (Testing General Relativity): आइंस्टीन रिंग, आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत (Einstein's theory of general relativity) की एक शानदार पुष्टि (spectacular confirmation) है।

आइंस्टीन रिंग अवलोकन और अनुप्रयोग
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यूक्लिड टेलीस्कोप ने हाल ही में कौन सी आइंस्टीन रिंग खोजी है?🔗

यूक्लिड टेलीस्कोप ने हाल ही में (फरवरी 2025) आकाशगंगा NGC 6505 के चारों ओर एक आइंस्टीन रिंग खोजी है। यह रिंग लगभग 590 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है, जिसे ब्रह्मांडीय दृष्टि से "नजदीक" माना जाता है। इस रिंग की खासियत यह है कि इसे NGC 6505 जैसी ज्ञात आकाशगंगा के आसपास देखा गया, जिसे पहले 1884 में खोजा गया था, परंतु उसकी आइंस्टीन रिंग पहली बार यूक्लिड ने देखी। जो दूर की आकाशगंगा इस रिंग को बना रही है वह लगभग 4.42 अरब प्रकाश वर्ष दूर है।

यूक्लिड से यह उम्मीद की जा रही है कि यह अपने 6-वर्षीय मिशन के दौरान लगभग 100,000 मज़बूत गुरुत्वाकर्षण लेंस (strong gravitational lenses) और हज़ारों अन्य आकाशगंगाओं को खोजेगा, जो पहले अज्ञात थीं।


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